ADSTERR

Thursday, October 9, 2025

मृत्यु निश्चित है - संसार भ्रम है - मृत्यु निश्चित है

 मृत्यु निश्चित है - संसार भ्रम है - मृत्यु निश्चित है 


मनुष्य जन्म पिछले जन्मो के कर्म का हिसाब है, और इस जन्म में मिला स्वाभाव और संबंध उसी पर आधारित होता है...

 

यँहा से मिली सारी उपलब्धियाँ - पद, पैसा, प्रतिष्ठा, और परिवार, सब कुछ ईधर ही छोड़ना पड़ता है और अंत में आत्मा अकेली इस संसार से विदा लेती है, किन्तु जब तक यहाँ है बेहोश अवस्था में अपने कर्म किये जाता है और नये जन्म का आविष्कार कर लेता है

 

यही भूल भुलैया में उलझी हुई जिंदगी कई बार पृथ्वी पर आती है !

 

संसार के बुरे कर्म वही मनुष्य कर शकते है जिन्हे अपनी मृत्यु याद नहीं

जो भी मनुष्य सदैव ये याद रखता है की में मरने वाला हूँ ...मृत्यु निश्चित है, वो कभी बुरे कर्म नहीं कर शकता -

किन्तु माया उसी शक्ति  नाम है जो बार बार मनुष्य को यह भ्रम में डाल देती है के,

"में कभी नहीं मरूंगा, मेरी मृत्यु नहीं है में यँहा सदैव रहने वाला हूँऔर यही भ्रम पाप कर्म के लिए हिम्मत देता है - (बाबा संतप्रताप)

 

No comments:

Post a Comment

काल चक्र

  काल चक्र  यह पूरा संसार काल चक्र के घेरे में है, यहाँ कुछ भी कायम नहीं, कुछ भी स्थिर नहीं कुछ भी शाश्वत नहीं - ना सत्ता, ना संपत्ति ना श...