मृत्यु से पहले संसारी बंधन का तुटना जरुरी है
ईस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले हर एक मनुष्य, सदाचारी हो या दुराचारी, सज्जन हो या दुष्ट, पुण्यात्मा हो या पापात्मा हो, पर हरेक मनुष्य को, उसकी मृत्यु से पहेले यह अनुभव जरूर ही कराया जाता है की यंहा सारे संबंध स्वार्थ के है, कोई भी उसका नही है, केवल और केवल भगवान ही उसे मदद कर शकता है, एक परम पिता परमात्मा के सिवा कोई भी उसका नही है...
और तभी वो मृत्यु के नजदीक जाता है, और मृत्यु, जो इस जिवन का परम सत्य है, उसका स्वीकार कर शकता है जब तक मनुष्य को इस संसार में किसी के भी साथ माया का लगाव और बंधन है तब तक आत्मा देह से निकल नही शकती...
- बाबा संत प्रताप

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