काल चक्र
यह पूरा संसार काल चक्र के घेरे में है, यहाँ कुछ भी कायम नहीं, कुछ भी स्थिर नहीं कुछ भी शाश्वत नहीं - ना सत्ता, ना संपत्ति ना शरीर ना सम्बन्ध ना स्वास्थ्य न रोग न शोक न आनन्द न प्रेम न धृणा न करुणा न भोग न भूख, न युवानी न वृद्धत्व न मृत्यु न दुःख न सुख - काल (समय) का पहिया हमेशा अपने साथ सब कुछ बहा के ले जाता है और मनुष्य कुछ भी नहीं कर शकता, बस खाली का खाली रह जाता है I
जो जन्मा है वो मरेगा जो बालक है वो युवा होगा जो युवा है वॉ वृद्ध होगा और जो वृद्ध है वो मृत्यु को प्राप्त हॉगा और जो मरेगा वो दूसरा जन्म लेगा -

